लम्बित वादों की सूचना एसएमएस के माध्यम से वादी एवं प्रतिवादी को उपलब्ध कराने का कार्य प्रारंभ कर सराहनीय कार्य: न्यायमूर्ति डी0के0 अरोरा


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राज्य लोक सेवा अधिकरण के  42वें स्थापना दिवस के कार्यक्रम 
में उच्च न्यायालयों के अनेक न्यायधीशों द्वारा सम्बोधन
लखनऊ:      उच्च न्यायालय केन्यायमूर्ति श्री डी0के0 अरोरा ने कहा कि राज्य लोक सेवा अधिकरण ने अपने 42वें स्थापना दिवस के अवसर पर लम्बित वादों से सम्बन्धित सूचना एसएमएस के माध्यम से वादी एवं प्रतिवादी को उपलब्ध कराने का कार्य प्रारंभ कर सराहनीय कार्य किया है। उन्होंने कहा कि अधिकरण में लम्बित वादों का त्वरित निस्तारण प्राथमिकता से कराने हेतु लम्बित वादों को सूचीबद्ध कर सुनवाई किये जाने से वादियों के लम्बित वादों का निस्तारण प्राथमिकता से सुनिश्चित होना स्वाभाविक ही है। उन्होंने कहा कि पीड़ित व्यक्ति को यथाशीघ्र नियमानुसार न्याय अवश्य मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि लम्बित वादों की वरीयता तय कर राज्य के समस्त श्रेणी के लोक सेवकों के लम्बित प्रकरणों का निस्तारण कराया जाना अधिकरण का सराहनीय कार्य है।
मा0 उच्च न्यायालय के मा0 न्यायमूर्ति श्री डी0के0 अरोरा, मा0 न्यायमूर्ति श्री राकेश श्रीवास्तव, मा0 न्यायमूर्ति श्री ए0आर0 मसूदी, मा0 न्यायमूर्ति श्री अनन्त कुमार, मा0 न्यायमूर्ति श्री अनिल कुमार श्रीवास्तव, मा0 न्यायमूर्ति श्री शशिकान्त, मा0 न्यायमूर्ति श्री रंगनाथ पाण्डेय, मा0 न्यायमूर्ति श्री राजेश सिंह चैहान, मा0 न्यायमूर्ति श्री रजनीश कुमार, मा0 सेवानिवृृत्त न्यायमूर्ति मा0 न्यायमूर्ति श्री अब्दुल मतीन, मा0 न्यायमूर्ति श्री वीरेन्द्र कुमार, मा0 न्यायमूर्ति श्री डी0के0 उपाध्याय, मा0 न्यायमूर्ति श्री राजन राय, मा0 न्यायमूर्ति श्री राजीव मेहरोत्रा, प्रमुख सचिव न्याय सहित मा0 न्यायमूर्तिगणों ने दीप प्रज्ज्वलित कर राज्य लोक सेवा अधिकरण के 42वें स्थापना दिवस कार्यक्रम का शुभांरभ इन्दिरा भवन में अपने विचार व्यक्त किये। स्थापना दिवस में अधिकरण के सेवानिवृत्त कर्मियों एवं अधिकरण के अधिवक्ताओं के श्रेष्ठ कार्यों हेतु अभिनन्दन किया गया। अरूणिमा फाउन्डेशन की श्रीमती अरूणिमा सिन्हा सहित अन्य संभ्रान्त नागरिकगण उपस्थित थे।
राज्य लोक सेवा अधिकरण के अध्यक्ष न्यायमूर्ति श्री सुधीर सक्सेना ने अपने सम्बोधन में बताया कि अधिकरण में वर्तमान वर्ष 2017 में जनवरी माह से अक्टूबर माह तक लम्बित 3 हजार 782 वादों का निस्तारण नियमानुसार सुनिश्चित कराया गया है। उन्होंने बताया कि अधिकरण में लम्बित 1245 अवमानना वादों का निस्तारण नियमानुसार कराकर वादियों को न्याय प्रदान कराया गया है। उन्होंने बताया कि 2763 नये वाद एवं 374 अवमानना वाद अधिकरण में दायर किये गये हैं। उन्होंने बताया कि विगत कई वर्षों के समय में दायर लगभग 9 हजार 756 मामले लम्बित हैं जिनका निस्तारण भी प्राथमिकता से कराये जाने हेतु अधिकरण प्रयासरत है।
श्री सुधीर सक्सेना ने बताया कि लम्बित वादों पर पारित आदेशों की जानकारी विभागीय वेबसाइट पर भी उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि अधिकरण में लम्बित वादों को सूचीबद्ध कर प्राथमिकता से सुनवाई सुनिश्चित कराई जा रही है ताकि अधिक से अधिक लम्बित वाद नियमों के तहत प्राथमिकता से निस्तारित हो सकें। उन्होंने कहा कि विगत वर्षों में लम्बित वादों के निस्तारण की तुलना वर्तमान में विगत 10 माह में निस्तारित किये गये वादों से की जाये तो कई गुना अधिक है। उन्होंने कहा कि लम्बित वादों का निस्तारण मात्र उद्देश्य नहीं होना चाहिए बल्कि नियमों के तहत फरियादियों को न्याय दिलाना प्राथमिकता होनी चाहिए।
स्थापना दिवस कार्यक्रम में अधिकरण के  उपाध्यक्ष श्री रोहित नन्दन सहित अन्य प्रशासनिक एवं न्यायिक सदस्य तथा काफी संख्या में अधिवक्तागण एवं संभ्रान्त नागरिकगण उपस्थित थे।

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