इलेक्रामा-2018 : बिजली कंपनियों के विश्व स्तरीय प्रदर्शनी में 650 विदेशी कंपनियां व भागीदार पहुंचे


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lucknow   : बिजली उद्योग के क्षेत्र की दुनिया की सबसे बड़ी प्रदर्शनी इलेक्रामा-2018 में ‘रिवर्स-बायर्स मीट’ के दौरान इस साल 80 करोड़ डॉलर के सौदे की उम्मीद जताई गई है। वर्ष वर्ष 2016 में 40 करोड़ डॉलर के कारोबारी समझौते हुए थे। हर दो साल पर होने वाली इस विश्व स्तरीय प्रदर्शनी में इस साल 650 विदेशी कंपनियां व भागीदार पहुंचे हैं जिनके बीच 2016 की प्रदर्शनी की तुलना में दो गुना मूल्य के कारोबारी समझौते हो सकते हैं। ‘रिवर्स-बायर्स मीट’ के दौरान कारोबारी एक दूसरे के संपर्क में आते हैं और व्यापारिक समझौते करते हैं।

भारतीय इलेक्ट्रिकल व इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माता संघ (आईईईएमए) की ओर से ग्रेटर नोएडा के एक्सपो मार्ट में आयोजित इलेक्रामा-2018 की पांच दिवसीय प्रदर्शनी के चौथे दिन आईईईएमए के महानिदेशक सुनील मिश्रा ने  आईएएनएस से बातचीत में कहा कि वर्ष 2016 में बेंगलुरू में आयोजित इलेक्रामा-2016 में 40 करोड़ डॉलर के कारोबारी समझौते हुए थे और 2016 के मुकाबले इस बार दोगुना मूल्य के व्यापारिक समझौते होने की संभावना है।

मिश्रा ने कहा कि यहां बिजली उत्पादन, बिजली पारेषण व वितरण कार्य में इस्तेमाल होने वाले बिजली उपकरणों को प्रदर्शित किया गया है और देश की सार्वजनिक व निजी क्षेत्र में इन कार्यो से जुड़ी कंपनियां इन उपकरणों के ग्राहक हैं। यह प्रदर्शनी बिजली उपकरण विनिर्माताओं और बिजली के उत्पादन व वितरण से जुड़ी कंपनियों को एक मंच उपलब्ध करवाती है जिसमें ‘रिवर्स-बायर्स मीट’ के दौरान वे एक दूसरे के संपर्क में आते हैं और उनके बीच व्यापारिक समझौते का मार्ग सुगम होता है।

उन्होंने कहा कि इस साल यह प्रदर्शनी काफी सफल रही है। प्रदर्शनी में नई प्रौद्योगिकी और अक्षय ऊर्जा की उपादेयता पर विशेष जोर दिया गया है। उन्होंने कहा कि आज परंपरागत ऊर्जा के बजाय नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग की बात हो रही है। खासतौर से बिजली चालित वाहनों के इस्तेमाल पर उद्योग का ध्यान केंद्रित है। उन्होंने कहा कि एक दिन ऐसा आएगा जब सारे पेट्रोल पंप की जगह बैटरी चार्जिग स्टेशन लग जाएंगे।

इलेक्रामा के इस 13वें संस्करण में बिलजी से परिचालित वाहनों, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, स्टोरेज सॉल्यूशन और अक्षय ऊर्जा की जरूरतों को विशेष रूप से दर्शाया गया है।

आयोजक के मुताबिक, प्रदर्शनी में 120 देशों की करीब 1,200 कंपनियों ने अपने उत्पाद पेश किए हैं।


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