MLA गिरीश सोनी ने भगवद गीता लेने से किया इनकार


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नयी दिल्ली:  आम आदमी पार्टी के विरुद्ध चंदा बंद सत्याग्रह वाले जब  गीता ज्ञापन कार्यक्रम के तहत गीता के प्रति आज मादीपुर के ‘आप’ विधायक गिरीश सोनी के देने उनके कार्यालय गए, तो विधायक ने इसे लेने से इनकार कर दिया.
 
डॉ मुनीश रायजादा.राकेश फलवाडिया, सबिता मिश्र, बी आर शुक्ल तथा अन्य लोकल साथी मादीपुर में ढोल नगाड़ों के साथ, गीता के पार्टी को लाल वस्त्र में समेट कर सर पर रख कर पूरी  मार्किट घुमने के बाद सोनी के कार्यालय पहुंचे. वहां ने केवल विधायक ऑफिस में दुबके रहे, उन्होंने पुलिस भी बुला ली. पुलिस ने सत्याग्रहियों को स्थल से जाने को कहा. रायजादा ने कहा कि एम् एल ए को जनता का प्रतिनिधि होने के नाते उनका गीता ज्ञापन स्वीकारना चाहिए तथा उसे आगे उनकी पार्टी के मुखिया तक पहुंचाना चाहिए.उन्होंने यह भी कहा कि यदि विधायक नहीं, तो उनके स्टाफ को अन्य सदस्य इसे स्वीकार कर ले. लेकिन पुलिस ने उन्हें वहां टिकने नहीं दिया.
इस पर रायजादा ने कहा: चंदा चोरी से अनुराग, लेकिन भगवद गीता से विरक्ति!! 
 
चंदा बंद सत्याग्रह ने अपना लक्ष्य बनाया हुआ  है की वह एक-एक विधान सभा में जाकर गीता का सन्देश सी एम्  साहेब तक जनता के चुने हुए प्रतिनिधि (MLA) के माध्यम से पहुंचाएंगे ताकि हमारी पार्टी के नेता अच्छे कर्मों के महत्व को समझें व पार्टी को मूल सिद्धांत- चंदे की पारदर्शिता, स्वराज, और आंतरिक लोकपाल की फिर से बहाली करें।
 
इसे से पहले कल  डॉ. मुनीश रायजादा तथा साथियों ने बिजवासन के विधायक श्री देवेंदर सहरावत के माध्यम से श्री अरविन्द केजरीवाल के नाम गीता ज्ञापन सोंपा था . सत्याग्रहियों ने उन्हें ‘गीता’ भेंट की और साथ ही पार्टी नेतृत्व को पार्टी को  फिर से सही रास्ते पर लाने के प्रयास का अनुरोध किया. श्री सहरावत ने  विनम्रता पूर्वक पूरे सम्मान के साथ स्वीकार किया.
 
चंदा बंद सत्याग्रह पिछले 4 माह से गाँधी जी के सत्याग्रही तरोकों से AAP के शीर्ष नेताओं को शुचिता की राजनीति करने के लिए आव्हान करता आया है तथा उन्हें सत्याग्रह के माध्यम से पार्टी चंदे को पब्लिक करने की अपील करता आ रहा है।
 
चंदा बंद सत्याग्रह के संयोजक डॉ मुनीश रायजादा तथा सदस्य फरवरी 2017 में मुख्यमंत्री केजरीवाल के आवास पर उन्हें  श्रीमद भगवत गीता भेंट करने गए थे, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया था।
 
 रायज़ादा ने कहा: “जब मुखिया ही ऐसा हो तो मुलाज़िम से क्या उम्मीद करी जा सकती है? फिर भी हमारा संघर्ष जारी रहेगा और ज़ोरो शोरों से से कोशिश यही रहेगी की हमारी पार्टी अपने सिद्धांतो पर वापिस लौट आये।”
चंदा बंद सत्याग्रह अभियान आम आदमी पार्टी में नैतिकता और मूल्यों की फिर से बहाली करने के लिए एक वैचारिक संघर्ष है। इसका उद्देश्य जनता को ‘आप’ की भ्रष्ट राजनीति से अवगत करना तथा यह प्रण दिलांना है की वो आम आदमी पार्टी को तब तक चंदा मत दे जब तक पार्टी अपने देनकर्ताओं की सूची सार्वजनिक नहीं कर देती।

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