बनारस में संजय दत्त ने किया पिंडदान, उमड़ी भीड़


पिंडदान का विधान शुरू करने से पहले संजय दत्त ने मां गंगा का पूजन भी किया। संजय दत्त को 21 लीटर दूध से मां गंगा का अभिषेक भी करना था लेकिन समयाभाव को देखते हुए संजय दत्त ने दूध से भरे पात्र को मंत्रोच्चार के बीच सिर्फ स्पर्श कर दिया।

बाद में एक वैदिक ब्राह्मण ने वह दूध गंगा को समर्पित किया। संजय दत्त के साथ भूमि फिल्म में उनकी बेटी का किरदार निभाने वाली अतिथि राव भी थीं। संजय दत्त और इससे पूर्व रानी घाट पहुंचने पर भरत सर्राफ, अनूप सर्राफ, आकाश सर्राफ,अंकित अग्रवाल, सुरेखा अग्रवाल, अशोक अग्रवाल, आनंद अग्रवाल, सुरेश तुलस्यान ने माल्यार्पण एवं स्मृति चिह्न प्रदानकर संजय दत्त और मान्यता का स्वागत किया।
माता-पिता सहित सात पीढ़ियों का पिंडदान करने के बाद रानी घाट पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए सिने स्टार संजय दत्त ने कहा कि मेरे लिए बनारस आकर पिंडदान करना बहुत जरूर थी। मेरे पिता ने शरीर त्यागने से पूर्व अंतिम मुलाकात में मुझसे कहा था कि जब आजाद होना तो मेरा और अपनी मां का काशी में पिंडदान अवश्य करना। अब मैं आजाद हो गया हूं तो यह कार्य करना मेरी प्राथकिता थी। पिंडदान करने के बाद मुझे पापा की अंतिम इच्छा पूरी करने की खुशी हो रही है। एक सवाल के जवाब में कहा कि बनारस में गंगा के किनारे आकर मुझे भी ऐसा लगा रहा है कि क्यों न मैं भी बनारसी ही हो जाऊं। अदालत और राजनीति से जुड़े सवालों की बौछार शुरू होते ही संजय दत्त ने मुस्कुराते हुए दोनों हाथ जोड़े और कहा कि इन सवालों के जवाब के लिए बहुत मौके मिलेंगे। इस बारे में फिर कभी बातें करेंगे।


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

Scroll To Top