प्रदेश में डिग्री स्तर पर छात्रायें कर रही हैं बेहतर प्रदर्शन: राज्यपाल


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लखनऊ,। प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने राज्य विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति के रूप में आज राजभवन में आयोजित एक पत्रकार वार्ता को सम्बोधित करते हुए प्रदेश में उच्च शिक्षा में छात्राओं के उत्कृष्ट प्रदर्शन से संबंधित आकड़े प्रस्तुत किये। राज्यपाल ने कहा कि आंकड़ों के अनुसार जहाँ भारतवर्ष में 1951 में पुरुषों की साक्षरता दर 27.16 प्रतिशत थी वहीं महिलाओं की साक्षरता दर मात्र 8.86 प्रतिशत थीं जबकि वर्ष 2011 में पुरुषों की साक्षरता दर 82.14 प्रतिशत तथा महिलाओं की साक्षरता दर 65.46 प्रतिशत हो गयी। उत्तर प्रदेश में वर्ष 2011 में पुरुषों की साक्षरता दर 79.24 प्रतिशत एवं महिलाओं की साक्षरता दर 59.26 प्रतिशत हो गयी है। दीक्षान्त समारोह में प्राप्त आंकड़ों को बताते हुए राज्यपाल ने कहा कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में छात्राओं द्वारा उत्कृष्ट प्रदर्शन किया गया है तथा उपाधि प्राप्त करने वाली छात्राओं की संख्या छात्रों से अधिक है जो महिला सशक्तीकरण का सूचक है। उन्होंने कहा कि यह सामाजिक दृष्टि से शुभ संकेत भी है।

राज्यपाल ने बताया कि 2016-17 में सम्पन्न कराये गये दीक्षान्त समारोहों में कुल 15,60,375 छात्रध्छात्राओं को विभिन्न पाठ्यक्रमों की उपाधियाँ प्रदान की गयीं जिनमें से 7,97,646 अर्थात् 51 प्रतिशत छात्राओं ने उपाधियाँ अर्जित की है। राज्य के सामान्य विश्वविद्यालयों में 7,82,626 अर्थात् 52 प्रतिशतय चिकित्सा विश्वविद्यालयों में 423 अर्थात् 39 प्रतिशतय प्राविधिक विश्वविद्यालयों में 14,015 अर्थात् 23 प्रतिशतय कृषि विश्वविद्यालयों में 165 अर्थात् 19 प्रतिशतय अन्य विश्वविद्यालयों यथा डाॅ0 शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय, लखनऊ में 363 अर्थात् 51 प्रतिशत और भातखण्डे संगीत सम विश्वविद्यालय, लखनऊ में 54 छात्राएं अर्थात् 61 प्रतिशत छात्राओं ने उपाधियाँ प्राप्त की। उत्कृष्ट प्रदर्शन कर कुल 1,653 पदकों में 1,085 पदक अर्थात् 66 प्रतिशत छात्राआंे को प्राप्त हुये। राज्य के सामान्य विश्वविद्यालयों में 70 प्रतिशत पदक छात्राओं के पक्ष में गये, वहीं चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में स्थापित विश्वविद्यालयध्संस्थान में 63 प्रतिशत, प्राविधिक शिक्षा के क्षेत्र में स्थापित विश्वविद्यालय में 54 प्रतिशत एवं कृषि क्षेत्र में स्थापित विश्वविद्यालयों में 44 प्रतिशत पदकों पर छात्राओं ने अपना अधिकार स्थापित किया। राज्य में स्थापित विशेष श्रेणी के अन्तर्गत स्थापित विश्वविद्यालय यथा डाॅ0 शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय, लखनऊ एवं भातखण्डे संगीत सम विश्वविद्यालय, लखनऊ में भी क्रमशः 65 एवं 53 प्रतिशत पदक छात्राओं द्वारा प्राप्त किये गये हैं।

राज्यपाल ने बताया कि कृषि विश्वविद्यालयों में कुल विद्यार्थियों की संख्या का मात्र 19 प्रतिशत छात्राएं हैं परन्तु इनके द्वारा 44 प्रतिशत पदक अर्जित किये गये हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा कृषकों की आमदनी आगामी 05 वर्षों में दोगुनी करने के संकल्प लिया गया है। अद्यतन कृषि तकनीकों को महिला किसानों की बड़ी संख्या के बीच पहुँचाने के लिए महिला कृषि प्रसार कर्ताओं की आवश्यकता के दृष्टिगत कृषि शिक्षा के लिए छात्राओं को प्रोत्साहन दिये जाने की आवश्यकता है।राज्यपाल ने बताया कि इस वर्ष 25 विश्वविद्यालयों के समारोह आयोजित किये जाने थे जिनमें से 23 विश्वविद्यालयों के दीक्षान्त समारोह सम्पन्न हो चुके हैं। शेष दो विश्वविद्यालय के दीक्षान्त समारोह शीघ्र होने हैं। 3 विश्वविद्यालय के छात्र अभी उपाधि स्तर तक नहीं पहुंचे हैं। दीक्षान्त समारोहों की वेशभूषा पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए राज्यपाल ने कहा कि सभी विश्वविद्यालयों के दीक्षान्त समारोह भारतीय वेशभूषा में गरिमापूर्ण ढंग से सम्पन्न हो रहे है, जिससे अपनेपन का बोध होता है। उन्होंने पूर्व में दीक्षान्त समारोह में धारण किये जाने वाले गाउन तथा हैट को दासता का सूचक बताया। उन्होंने कहा कि विगत 04 वर्षों से विश्वविद्यालयों के दीक्षान्त समारोह नियमित रूप से सम्पन्न कराये जा रहे हैं।

श्री नाईक ने कहा कि उत्तर प्रदेश का राज्यपाल पद की शपथ लेते समय मेरा एक संकल्प था कि प्रदेश के विश्वविद्यालयों का कुलाधिपति होने के नाते शैक्षिक सत्र को नियमित कराया जाये तथा विद्यार्थियों को उनकी उपाधियाँ समय से उपलब्ध करायी जायें ताकि उन्हें रोजगार या व्यवसाय के अवसर ढूँढने में उपाधि के अभाव के कारण किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े। राज्यपाल ने उच्च शिक्षा की गुणवत्ता एवं अनुसंधान में उत्तरोत्तर वृद्धि हेतु विश्वविद्यालयों में शैक्षिक पदों को भरने, विश्वविद्यालयों की कार्य प्रणाली को पारदर्शी एवं उत्तरदायी बनाने के लिए आॅनलाइन प्रक्रिया का अधिकाधिक प्रयोग करने, सभी विश्वविद्यालयों के नैक मूल्याँकन, शिक्षा को रोजगारपरक बनाने के उद्देश्य से शैक्षिक एवं औद्योगिक संस्थानों के मध्य सामंजस्य स्थापित करने, विश्वविद्यालयों में शिक्षा एवं शोध के लिए सौहार्दपूर्ण वातावरण निर्मित करने, शोध कार्यक्रमों को प्रोत्साहित करने के आवश्यक कदम उठाये जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा में गुणात्मक सुधार को लेकर वे प्रयास कर रहे है ताकि उत्तर प्रदेश के शिक्षण संस्थान उत्कृष्टता कर स्थान प्राप्त करें।


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