UP में शिक्षक उत्पीड़न एवं शोषण की तथाकथित महत्वाकांक्षी परियोजना : वित्तपोषित महाविद्यालयों में स्ववित्तपोषित का खेल


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लखनऊ| उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2000 से प्रदेश के वित्तपोषित महाविद्यालयों में स्ववित्तपोषित योजना के नाम पर शिक्षक उत्पीड़न शोषण एवं भ्रष्टाचार व अनियमितता के पोषण हेतु एक महत्वपूर्ण एवं महत्वाकांक्षी तथाकथित योजना का संचालन किया जा रहा है। शिक्षक उत्पीड़न एवं शोषण की एक ऐसी योजना है जो पूरे भारत वर्ष के किसी और प्रांत में वित्तपोषित महाविद्यालयों में संचालित नहीं है। भारत वर्ष के अन्य राज्यों में राजकीय महाविद्यालय है तो राजकीय ही है, वित्तपोषित महाविद्यालय, वित्तपोषित ही है और निजी महाविद्यालय(स्ववित्तपोषित), पूर्णतः निजी महाविद्यालय ही है, लेकिन उत्तर प्रदेश में वित्तपोषित महाविद्यालयों में स्ववित्तपोषित का खेल विगत 18 वर्षो से अबाध गति से जारी है !!!

केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय(केन्द्रीय उच्च शिक्षा विभाग),
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अनुसार भारत वर्ष में राजकीय महाविद्यालय, अनुदानित अशासकीय असहायता प्राप्त महाविद्यालय, अल्पसंख्यक महाविद्यालय एवं निजी महाविद्यालयो(स्ववित्तपोषित) का ही संचालन होता है, लेकिन तत्कालीन उत्तर प्रदेश की सरकार द्वारा वर्ष 2000 में एक अध्यादेश के तहत उच्च शिक्षा में एक ऐसी विसंगति पूर्ण योजना जो “न नर में न नारी में” के पैटर्न पर वित्तपोषित महाविद्यालयों में स्ववित्तपोषित का खेल प्रारम्भ कर दिया गया, ऐसे वित्तपोषित महाविद्यालयों के स्ववित्तपोषित शिक्षको को राज्य सरकार, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग एवं विश्वविद्यालय न तो वित्तपोषित शिक्षक मान सकता है और न हीं पूर्णतः निजी महाविद्यालय का शिक्षक भी नहीं माना जा सकता है।

हास्यास्पद तो यह हैकि उत्तर प्रदेश की उच्च शिक्षा के केन्द्र के रुप में स्थापित वित्तपोषित महाविद्यालयों में संचालित स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों का पूर्ण नियंत्रण वित्तपोषित शिक्षको के हाथ में ही है। और समान योग्यता,समान कार्य,समान विषय विभाग एवं महाविद्यालय में कार्यरत होने के बावजूद स्ववित्तपोषित शिक्षको को सरकार व शासन की गलत नीतियो एवं शोषणवादी प्रवृत्ति के धनी वित्तपोषित महाविद्यालय प्रबन्धको/प्राचार्यो के हाथ की कठपुतली बना कर मरने के लिए छोड़ दिया गया है।

आखिर यह शोषण उत्पीड़न और दोहरी व्यवस्था का विसंगतिपूर्ण आधार नहीं तो और क्या है ?कि जहाँ वित्तपोषित महाविद्यालयों का प्रबन्धक वित्तपोषित का, प्राचार्य वित्तपोषित का, विभागाध्यक्ष वित्तपोषित का, कार्यालय अधीक्षक वित्तपोषित का, लेकिन गुलामी करने वाला शिक्षक स्ववित्तपोषित ?? जिसके जीवन यापन व सेवा सुरक्षा का कोई प्राविधान ही नहीं !!!!

ऐसा नहीं है कि प्रदेश सरकार व सरकार के मुखिया इस तथ्य से अनभिज्ञ हो ? आख़िर चाहे पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव रहे हो व अखिलेश यादव(चौधरी चरण सिंह पी.जी.कालेज हेवड़ा, इटावा) या फिर वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (दिग्विजय नाथ पी.जी.कालेज गोरखपुर), सब के सब ऐसे ही वित्तपोषित महाविद्यालयों में स्ववित्तपोषित के खेल से सम्बन्धित महाविद्यालय प्रबन्धतंत्र से ही जुड़े हुए है, लेकिन समस्या के समाधान के बजाय सभी को कहीं न कहीं अपनी शोषण की दुकान के संचालन की ही फिक्र है, न कि स्ववित्तपोषित शिक्षको की दयनीय दशा की !!!

ऐसे वित्तपोषित महाविद्यालयों में आर्थिक विपन्नता व शोषण उत्पीड़न का शिकार स्ववित्तपोषित अनुमोदित शिक्षको द्वारा वर्ष 2000 से ही अपनी दशा व आर्थिक परिस्थिति के सुधार के लिए पूर्ववर्ती सरकारो से लेकर वर्तमान सरकार के समक्ष अनुनय विनय किया जाता रहा लेकिन कभी भी किसी सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंग सका। ऐसे शिक्षको के द्वारा समय समय पर अनुदानित महाविद्यालय विश्वविद्यालय स्ववित्तपोषित अनुमोदित शिक्षक संघ के बैनर तले प्रदेश अध्यक्ष डां.के.यस.पाठक के नेतृत्व में अपनी मांग रखी भी जाती रही है लेकिन वित्तपोषित महाविद्यालय प्रबन्धन के धनबल के दबाव व रसूख के आगे नतमस्तक हो कर पूर्ववर्ती सरकारो द्वारा ऐसे शिक्षको की व्यथा व पीड़ा को नजरंदाज कर कालेज प्रबन्धन के हाथो की कठपुतली बना 18 वर्ष से कर मरने के लिए विवश कर दिया गया है।

पूर्व सरकारो की उपेक्षा दुत्कार एवं महाविद्यालय प्रबन्धतंत्र की आये दिन शोषण उत्पीड़न व निस्कासन की धमकियो को सहन करते हुए अपनी उम्र के 18 बसंत गवां चुके वित्तपोषित महाविद्यालयों के स्ववित्तपोषित शिक्षको को वर्ष 2017 में सत्तासीन योगी सरकार में फिर अपने भविष्य के उत्थान व विकास की एक आस जगी है।

ऐसे शिक्षको द्वारा कई मौको पर प्रदेश सरकार के मुखिया से हुई मुलाकात के बाद सहृदय मुख्यमंत्री के निर्देश पर वित्तपोषित महाविद्यालयो के स्ववित्तपोषित शिक्षको के विनियमितिकरण की अधिकारिक रुप से प्रक्रिया प्रारम्भ भी की गयी है लेकिन यह भी अभी भविष्य के गर्त में ही हैकि कहीं पूर्व सरकारो की भाँति स्ववित्तपोषित शिक्षको के साथ आश्वसन आश्वासन का खेल खेल कर भविष्य के साथ विश्वासघात न हो !!! फिर भी सबका साथ सबका विकास की विचारधारा से आविर्भूत भाजपा नीति योगी सरकार से ही अब वित्तपोषित महाविद्यालयों के स्ववित्तपोषित शिक्षको को जीवन के उत्थान में भविष्य सृजन की अन्तिम आस अवशेष है…..!!!!


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