प्रदेश में किसानों की सुधि लेने वाला कोई नहीं है ,नाराज किसानों ने विधानसभा के सामने आलू फेंका


उद्यान निदेशक एसपी जोशी ने तत्काल अपने दफ्तर पहुंचकर सभी को बारी-बारी से ब्रीफ करना शुरू किया। उन्होंने कहा कि कोल्ड स्टोरों से लखभग120 लाख कुंतल आलू निकल चुके हैं और वे करीब-करीब खाली हो चुके हैं। बाजारों में नया आलू आना शुरू हो चुका है लिहाजा आलू का लागत मूल्य फिलहाल कोई मुद्दा नहीं होना चाहिए। उ‌न्होंने यह भी कहा कि जो आलू विधानसभा, राजभवन, एनेक्सी व अन्य स्थानों पर किसानों ने फैलाए हैं या फेंके हैं वह खराब आलू था और सम्भवत: कोल्ड स्टोरों से बाहर किया गया व अनुपयोगी था।

राज्य सरकार की ओर से अप्रैल में किसानों से सीधे आलू खरीदने का फैसला किया गया। प्रदेश के इतिहास में किसानों से आलू खरीदने का सरकार ने यह पहली बार निर्णय किया था। किसानों की शिकायत है कि उनके हित में उठाया गया यह एक अच्छा  निर्णय थोड़ी देरी से लिया गया। अगर यही निर्णय मार्च महीने से पूर्व ले लिया गया होता तो आलू उत्पादक किसान इसका पूरा लाभ उठा पाते। यह बात दीगर है कि सरकार 19 मार्च को ही बनी और उसके बाद सरकार ने आलू खरीद का फैसला कर खरीद शुरू की।अप्रैल तक ज्यादातर किसानों ने अपने आलू कोल्ड स्टोरों में रख दिए थे। जिसका बचा है वह आमतौर पर मानक से छोटा या बड़ा और दाग लगा था। ऐसे में जिसने कोल्ड स्टोरों में अपना आलू रख दिया वह निकालने को तैयार नहीं था क्योंकि उसे प्रति कुंतल दो से सवा दो सौ रुपये कोल्ड स्टोर को किराया देना पड़ता। वहीं उसे बोरे की कीमत 40 रुपये का भी भुगतान करना पड़ता। इसके बाद क्रय केन्द्र तक ले जाने के लिए भाड़ा अलग से देना होता। ऐसे में क्रय केन्द्रों पर आलू बेचना किसानों के लिए फायदे का सौदा नहीं था।


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